मेरा
नाम लिक्खा
पहले...नाजुकी से
फिर क्यूँ
मुस्कुरा गई
...हाय
डॉक्टर
खुद को आईने में
देख...पूछा
मेरे
आने का सबब
...हाय
डॉक्टर
अब गुमशुदा है
मेरे दिल की धड़कन
जब से...आला
हटा गई
...हाय
डॉक्टर
कल मस हुए थे शब
में हाथ-से-हाथ
आज…
पट्टी चढ़ा गई
...हाय
डॉक्टर
अदना सी ज़िक्र दिल
की नश्तरी पे,
चीड-फाड़
सुझा गई
...हाय
डॉक्टर
वो दिल के टुकड़े
कर दे
करम होगा
हर टुकड़ा...सदा
देगा
...हाय
डॉक्टर
वो दवा बनें मेरे
दर्द-ए-दिल का
मैं...
दुआ करूँगा
...हाय
डॉक्टर
द्वार पर आया वसंत ऋतुराज
जवाब देंहटाएंछेड़कर मन-वीणा के तार ,
मधुर मलय समीर मिलाये -
मधुर मिलन अधिराज
सुगन्धित-पुष्पित-मुदित जग
हर्षित-आह्लादित खग ,
जल थल स्नेहमयी सरोवर -
गाये आरोहावरोह स्वर
रंग-तरंगित दस दिशा
राग बसंत गाये निशा ,
तरु-द्रुम करे केलि क्रीडा-
सुनी वसंत आगमन कथा
आम्र-पल्लव मुकुलित हुआ
हर्ष चहूँदिस फिर छाया ,
उल्लसित धरा गगन हुआ -
आया वसंत-वसंत आया
आज फिर से आसमान पिघल रहा है
जवाब देंहटाएंकांच की बूँदें ज़मीन पे बिखरी पड़ी है
कागज़ की तमाम कश्तियाँ किनारे
ढूँढती हुई राह भटक गयी
वो धूप का कोना भी फिर से सतरंगी हो रहां है
अक्सर वो धुन जहन में आ जाता है
जो तुमने कभी गुनगुनाया था
केवल मेरे लिए