*लोचन लोलुप इन्दु-वदन का, कर्ण कांक्षी मृदु-वाणी का* - *हृदय अभिलषित प्रेम-वारिधि रूप-राग-हठ मानी का*

सोमवार, 27 मई 2013

एक (दिल के) रोगी की (सं)वेदना


मेरा
नाम लिक्खा पहले...नाजुकी से
फिर क्यूँ
मुस्कुरा गई
...हाय डॉक्टर

खुद को आईने में देख...पूछा
मेरे
आने का सबब
...हाय डॉक्टर

अब गुमशुदा है मेरे दिल की धड़कन
जब से...आला
हटा गई
...हाय डॉक्टर

कल मस हुए थे शब में हाथ-से-हाथ
आज
पट्टी चढ़ा गई
...हाय डॉक्टर

अदना सी ज़िक्र दिल की नश्तरी पे,
चीड-फाड़
सुझा गई
...हाय डॉक्टर

वो दिल के टुकड़े कर दे
करम होगा
हर टुकड़ा...सदा देगा
...हाय डॉक्टर

वो दवा बनें मेरे दर्द-ए-दिल का
मैं...
दुआ करूँगा
...हाय डॉक्टर